क्या भारतीय रेस्टोरेंट को म्यूज़िक लाइसेंस चाहिए? PPL, IPRS की लागत और नियम
हाँ, आपके रेस्टोरेंट में म्यूज़िक बजाना—चाहे वो बैकग्राउंड में बॉलीवुड के गाने हों, लाइव परफॉर्मेंस हो, या फिर सिर्फ रेडियो भी—इसके लिए भारत में क़ानूनी तौर पर लाइसेंस की ज़रूरत होती है। बहुत से रेस्टोरेंट मालिकों को पता नहीं होता कि सिर्फ गाने खरीदने या स्ट्रीमिंग करने से कमर्शियल इस्तेमाल की इजाज़त नहीं मिल जाती। आपको दो संस्थाओं से अलग-अलग लाइसेंस लेना पड़ता है: PPL (Phonographic Performance Limited) साउंड रिकॉर्डिंग के लिए और IPRS (Indian Performing Rights Society) म्यूज़िकल कंपोज़िशन और लिरिक्स के लिए।
लाइसेंस की लागत और कैसे कैलकुलेट होती है
PPL का चार्ज आपके रेस्टोरेंट की सीटिंग कैपेसिटी और एरिया पर निर्भर करता है। एक आम 50-सीटर रेस्टोरेंट के लिए, PPL के लिए सालाना ₹10,000-₹15,000 का खर्चा आएगा। IPRS की फीस भी इसी तरह तय होती है, छोटे से मीडियम रेस्टोरेंट के लिए ₹6,000-₹12,000 प्रति वर्ष। मुंबई या दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में बड़े रेस्टोरेंट को इससे ज़्यादा देना पड़ता है। दोनों लाइसेंस हर साल रिन्यू करने होते हैं, और आपको दोनों संस्थाओं में अलग-अलग अप्लाई करना होगा।
बिना लाइसेंस के म्यूज़िक चलाने पर Copyright Act के तहत ₹2 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। जल्दी कंप्लायंट बन जाइए—अपने रेस्टोरेंट के साइज़ के हिसाब से अप्लाई करने के लिए सीधे PPL (pplindiaonline.in) और IPRS (iprs.org) से संपर्क करें।
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